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Lajawab Shayari

do din ki zindagi hai

दो दिन की ज़िन्दगी है इसे दो उसूलो सिजिओं 

१ रहो फूलो की तरह २ बिखरो खुशबू की तरह 

do din ki zindagi hai

lo patthar ko

लोग पत्थर के बुतों को पूज कर मासूम रहे यारो

हम ने एक इंसान को चाहा और गुनाहगार हो गए

lo patthar ko

kabhi mahsoos kar

मेरी आँखों में छुपी उदासी को कभी महसूस तो कर
हम वो हैं जो सब को हंसा कर रात भर रोते है

kabhi mahsoos kar

mohabbat na kiya karo

मैं क़ाबिल-ए-नफ़रत हूँ तो छोड़ दो मुझको, 

यूं मुझसे दिखावे की मोहब्बत ना किया करो

mohabbat na kiya karo

wafa ka kasoor

मेरी तलाश का है जुर्म या मेरी वफा का क़सूर, 

जो दिल के करीब आया वही बेवफा निकला

wafa ka kasoor
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