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Ahmad Faraz Shayari

2022-02-16 13:56:34
उसकी वो जाने उसके पास वफ़ा था या न था !
तुम फ़राज़ अपनी तरफ से तो निभाते जाते !!

Wafa tha ya na tha

वो भी रो देगा उसे हाल सुनाएँ कैसे !
मोम का घर है चिरोगों को जलाएं कैसे !
दूर होता तो उसे ढूंढ लेते फ़राज़ !
रूह में छुप के बैठा है उसे पाएं कैसे !!

Wo bhi ro dega

शाम-ए तन्हाई में इजाफा बेचैनी !
एक तेरा ख्याल न जाना एक दूसरा तेरा जवाब न आना !!

Tera Khyaal

Tera Khyaal
इश्क़ के नशे डूबे तो ये जाना हमने फ़राज़ !
की दर्द में तन्हाई नहीं होती.तन्हाई में दर्द होता है !!

Ishq Ka Nasha

Ishq Ka Nasha
खाली हाथों को कभी गौर से देखा है फ़राज़ !
किस तरह लोग लकीरों से निकल जाते हैं !!

Khali Hathon ko

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